मैनपाट: "छत्तीसगढ़ का शिमला" घूमने की पूरी गाइड
अंबिकापुर से मैनपाट के एक दिन के लिए सब कुछ: तिब्बती बस्ती और मठ, टाइगर पॉइंट, उल्टा पानी और जलजली की उछलती ज़मीन, घूमने का सबसे अच्छा मौसम, और क्या साथ ले जाएँ।
मैनपाट अंबिकापुर के उत्तर में एक चौड़ा, हरा-भरा पठार है, जो समुद्र तल से लगभग 1,070–1,085 मीटर ऊँचा है। यह नीचे के मैदानों से साफ़ तौर पर ठंडा है, इसीलिए इसे अक्सर “छत्तीसगढ़ का शिमला” कहा जाता है। और यहाँ कुछ ऐसा भी है जो राज्य के किसी और हिल स्टेशन पर नहीं: साठ साल से ज़्यादा समय से बसा तिब्बती समुदाय।
कैसे पहुँचें
सबसे सीधे रास्ते से मैनपाट अंबिकापुर से लगभग 50–55 किमी दूर है (कुछ रास्तों और बोर्डों पर दूरी ज़्यादा लिखी मिलती है)। दर्शनीय जगहों तक नियमित सार्वजनिक परिवहन नहीं है, इसलिए दिन भर के लिए टैक्सी लेना सबसे आसान है। नाश्ते के बाद निकलें, तो रात के खाने तक लौट आएँगे।
तिब्बती मैनपाट
1962 में, दलाई लामा के साथ भारत आए तिब्बती शरणार्थियों को मैनपाट पर ज़मीन दी गई। फेंडेलिंग कहलाने वाली यह बस्ती लगभग 1,400 लोगों के लिए करीब 3,000 एकड़ ज़मीन से शुरू हुई, जो लगभग 25 किमी के दायरे में सात कैंपों में बँटी है। आज भी लगभग एक हज़ार तिब्बती यहाँ रहते हैं, खेती करते हैं और अपनी परंपराएँ ज़िंदा रखते हैं।
सबसे प्रसिद्ध मठ ढकपो शेडुपलिंग है, जो 1970 में बना। कैंपों में प्रार्थना-झंडे, स्तूप और प्रार्थना-चक्र दिखते हैं, और तिब्बती क़ालीन बुनाई के लिए हस्तशिल्प केंद्र बनाए गए थे।
थोड़ा शिष्टाचार: स्तूप और प्रार्थना-चक्र के चारों ओर घड़ी की दिशा में चलें, मठ में शालीन कपड़े पहनें, और किसी की फ़ोटो लेने से पहले पूछ लें।
क्या देखें
- टाइगर पॉइंट: चट्टानी किनारे से जंगल भरी घाटी में गिरता झरना। बरसात में और उसके ठीक बाद सबसे भरा होता है।
- फ़िश पॉइंट: एक और झरना और व्यू पॉइंट, टाइगर पॉइंट से शांत।
- उल्टा पानी: एक धारा जो ऊपर की ओर बहती दिखती है। यह एक दृष्टि-भ्रम है, पर बहुत यक़ीन दिलाने वाला।
- जलजली: स्पंज जैसी ज़मीन का एक टुकड़ा, जो कूदने पर पैरों के नीचे उछलती है।
- परपटिया व्यू पॉइंट: पठार के नीचे फैले जंगलों का चौड़ा नज़ारा।
कब जाएँ
- अक्टूबर से फ़रवरी में दिन साफ़ और ठंडे रहते हैं। सर्दियाँ कड़ाके की होती हैं: दिसंबर में मैनपाट पर लगभग 3 °C तापमान दर्ज हुआ है, और सबसे ठंडी सुबहों में घास पर पाला जम जाता है।
- जुलाई से सितंबर बरसात का मौसम है। पठार सबसे हरा-भरा होता है और झरने सबसे सुंदर, पर रास्ते फिसलन भरे हो सकते हैं और कोहरा छा सकता है।
- मैनपाट महोत्सव, जिसमें शैला और करमा जैसे लोक नृत्य, संगीत और स्टॉल होते हैं, आम तौर पर फ़रवरी या मार्च में रोपाखार जलाशय के पास होता रहा है। तारीख़ें हर साल बदलती हैं, इसलिए योजना से पहले जाँच लें।
- अप्रैल से जून गर्म रहता है, फिर भी अंबिकापुर से हल्का।
क्या साथ ले जाएँ
- नवंबर से फ़रवरी तक एक गर्म कपड़ा, और दिसंबर-जनवरी की सुबह के लिए अच्छी जैकेट।
- झरनों के रास्तों के लिए अच्छी पकड़ वाले आरामदायक जूते।
- पानी और नाश्ता। पठार पर खाने के विकल्प साधारण हैं, इसलिए हर पड़ाव पर खाना मिलने का भरोसा न रखें।
- स्टॉल और हस्तशिल्प केंद्रों पर छोटी ख़रीदारी के लिए कुछ नकद।
इसे बड़ी यात्रा का हिस्सा बनाएँ
मैनपाट अंबिकापुर से एक दिन की बेहतरीन सैर है। इसे शहर के मंदिर और महल और रामगढ़ की गुफाओं के साथ जोड़ने के लिए हमारी तीन दिन की सरगुजा यात्रा गाइड देखें, और इलाके की कहानी सरगुजा के संक्षिप्त इतिहास में पढ़ें।

